शिव तांडव भगवान महादेव का दिव्य नृत्य है, जो सृष्टि, पालन और संहार — तीनों शक्तियों का प्रतीक है।
यह नृत्य ब्रह्मांड के सृजन और विनाश के अनंत चक्र को दर्शाता है।
जब भगवान शिव तांडव करते हैं, तब उनकी जटाओं से गंगा प्रवाहित होती है, मस्तक पर चंद्रमा शोभा देता है, गले में सर्प, और हाथ में डमरू बजता है जिसकी ध्वनि पूरे ब्रह्मांड में गूंजती है।
“शिव तांडव स्तोत्र”, जो रावण द्वारा रचित है, इसी दिव्य तांडव का वर्णन करता है। इसमें शिव की शक्ति, सौंदर्य और भक्ति का अद्भुत संगम दिखाई देता है।
यह तांडव हमें सिखाता है कि विनाश ही सृजन का मार्ग है, और जीवन में हर अंत एक नई शुरुआत का संकेत देता है।