🙏 जय श्रीराम! जय हनुमान!
यह नया हनुमान भजन “लौट आओ पवनकुमार”
लक्ष्मण मूर्छा और संजीवनी पर्वत की पावन कथा पर आधारित है।
इस भजन में श्रीराम की करुण पुकार,
पवनसुत हनुमान का अद्भुत पराक्रम
और भक्ति, सेवा तथा वीरता का भाव प्रकट होता है।
✨ Bhajan Highlights:
• संजीवनी पर्वत की कथा
• भक्ति और वीर रस का संगम
• सरल एवं शुद्ध हिन्दी शब्द
• राम–हनुमान भक्ति के लिए श्रेष्ठ भजन
🚩 यह भजन मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती,
सुबह की पूजा और राम भक्ति के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।
This new Hanuman hymn, "Laut Aao PawanKumar," is based on the sacred story of Lakshman's unconsciousness and the Sanjivani mountain.
This hymn reveals the compassionate cry of Lord Rama, the amazing prowess of the son of the wind, Hanuman, and the spirit of devotion, service, and valor.
✨ Bhajan Highlights:
• The story of Mount Sanjivani
• Confluence of devotion and heroic charm
• Simple and pure Hindi words
• Best bhajans for Ram–Hanuman devotion
🚩 This bhajan is especially suitable for Tuesdays, Saturdays, Hanuman Jayanti, morning prayers and Ram Bhakti.
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Lyrics:
-------- लौट आओ पवनकुमार ---------
जय जय राम…
जय जय हनुमान…
पवनसुत बलवान…
लौट आओ पवनकुमार,
श्रीराम तुम्हें बुलाते हैं।
लखन के बचा लो प्राण,
श्रीराम तुम्हें बुलाते हैं।
गए थे तुम संजीवन लाने,
पर्वत पार कर आए।
घोर अंधेरा छाया वन में,
पल-पल प्राण घबराए।
सेना देखे राह तुम्हारी,
मन सबका बेचैन।
श्रीराम निहारें नभ की ओर,
बीते हर एक चैन।
लखन पड़े हैं मूर्छित होकर,
श्वास बहुत धीमी।
भैया की यह दशा देखकर,
रो उठे रघुवीरा।
कौशल्या के लाल हैं लखन,
माता के अरमान।
हे पवनसुत जल्दी आ जाओ,
बचाओ उनके प्राण।
रात कटे ना पल भर भी,
नयन थके हैं देख देख।
दिशा-दिशा में आशा खोजे,
सबकी रुकी है टेक।
डर है कहीं न टूट जाए,
जीवन की यह डोर।
हे अंजनि के लाल कृपाकर,
अब तो कर दो भोर।
लालिमा संग गगन में चमके,
पवनसुत की छाया।
संजीवन लेकर लौटे वीर,
मंगल घड़ी फिर आया।
लखन उठे, सेना जागी,
जय जयकार गूँज उठी।
धन्य हुए श्रीराम के दास,
भक्ति अमर हो गई।
जय जय हनुमान बलवीरा,
जय रघुनंदन के दास।
संकट मोचन पवनसुत,
तू ही सबका विश्वास।
जय जय राम…
जय जय हनुमान…