भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के राज्य सेक्रेटरी इंद्रेश मैखुरी कहते हैं कि अंकिता केस में फैसला देने वाली कोटद्वार की एडिशनल सेशन जज रीना नेगी ने अपने फैसले में बार-बार वीआईपी का जिक्र किया था। कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने ही ने मुख्य आरोपी पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को हत्या के आरोप में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मैखुरी कहते हैं कि इसका मतलब है कि अंकिता की हत्या वीआईपी को स्पेशल ट्रीटमेंट देने से इनकार करने और सबूत छिपाने के लिए की गई थी। उन्होंने कहा कि मई 2025 में फैसला आने के बाद भी राज्य की जनता को लगता था कि मामले में न्याय नहीं हुआ और वीआईपी की खातिरदारी से इनकार करने के चलते ही अंकिता की हत्या हुई और जब उर्मिला सनावर ने ऑडियो टेप्स जारी किए तो जनता के मन में बैठे आक्रोश की चिंगारी जल उठी। इसलिए लोग न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर हैं।
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