ईरान में दूसरे सप्ताह भी हिंसक प्रदर्शनों का दौर जारी है. हिंसक प्रदर्शनों में मारे जाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 116 तक पहुंच चुकी है. वहीं, अब तक 2,600 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. प्रदर्शनों के चलते ईरान में इंटरनेट और फोन लाइन बंद है और ईरान का बाहरी दुनिया से संपर्क करीब-करीब कट गया है, लेकिन प्रदर्शनों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है.
महंगाई से त्रस्त ईरान की जनता सड़कों पर है. तेहरान में अयातुल्ला अली खुमैनी के खिलाफ नारे लग रहे हैं और सत्ता बदलाव की मांग जोर पकड़ने लगी है. वहीं, सुरक्षा बल इस विद्रोह को कुचलने में जुटे हैं. ईरानी टीवी में प्रदर्शनकारियों को आतंकवादी बताया गया है. ईरान के अटॉर्नी जनरल ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों को एनिमी ऑफ गॉड माना जाएगा और इसकी सजा मौत भी हो सकती है. वहीं, दंगाईयों की मदद मदद करने वाले भी मृत्युदंड के भागी हो सकते हैं.
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खुमैनी ने प्रदर्शनों के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है. ईरानी सरकारी मीडिया ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इज़राइल के आतंकवादी एजेंटों ने आग लगाई और हिंसा भड़काई. वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार हुए, तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है. ट्रंप ने ये भी कहा कि ईरान आजादी चाहता है और अमेरिका उसकी मदद के लिए तैयार है.
ईरान में पल-पहल बदल रही स्थिति पर भारत भी करीब से नजर रख रहा है. विदेश मंत्रालय ने भारत के लोगों से ईरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील की है.