Makar Sankranti 15 January को क्यों? 55 साल तक अब नहीं बदलेगी तारीख, जानें इसके पीछे का बड़ा वैज्ञानिक और खगोलीय रहस्य। आखिर क्यों 14 जनवरी की जगह अब 15 जनवरी को ही सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं और इसका आपके जीवन पर क्या असर होगा?
मकर संक्रांति सिर्फ तिल-गुड़ खाने या पतंग उड़ाने का त्योहार नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपा है हजारों साल पुराना विज्ञान और खगोलशास्त्र (Astronomy)। इस वीडियो में ऋचा आपको बता रही हैं कि मकर संक्रांति एकमात्र ऐसा भारतीय पर्व क्यों है, जो चंद्रमा के बजाय सूर्य की चाल पर आधारित है।
इस साल 15 जनवरी को रात 9 बजकर 38 मिनट पर सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी राशि परिवर्तन को 'संक्रांति' कहा जाता है। इस परिवर्तन के साथ ही अशुभ माना जाने वाला 'खरमास' समाप्त हो जाएगा और शादी-विवाह, गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाएंगे।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अब अगले 55 सालों तक, यानी साल 2080 तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इसके बाद सूर्य की गति में होने वाले गणितीय अंतर के कारण यह तारीख फिर बदलकर 16 जनवरी हो जाएगी। आखिर ऐसा क्यों होता है और इसके पीछे की सटीक गणना क्या है? जानने के लिए देखिए हमारा यह खास वीडियो।
About the Story:
This video explains the scientific and astronomical reasons why Makar Sankranti is shifting from January 14 to January 15. Based on solar movements, the Sun enters Capricorn (Makar Rashi) on this day, marking the end of Kharmas. Learn why this date will remain fixed for the next 55 years until 2080 and the logic behind this celestial shift.
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