ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका गहराती जा रही है। विश्लेषकों और ईरानी अधिकारियों के अनुसार यदि अमेरिका या इज़राइल ईरान पर सीधा हमला करता है, तो ईरान का “प्रतिरोध का धुरा” (Axis of Resistance) — जिसमें यमन के हूती विद्रोही और लेबनान का हिज़्बुल्लाह शामिल हैं — सक्रिय हो सकता है।
ईरान की संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर क़ालिबाफ़ ने साफ़ चेतावनी दी है कि किसी भी अमेरिकी हमले का जवाब अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इज़राइल पर हमलों से दिया जाएगा। हूती गुट पहले ही ऐलान कर चुका है कि ईरान पर हमला पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक देगा और वे अमेरिकी जहाज़ों, ठिकानों और रेड सी की शिपिंग को निशाना बना सकते हैं।
वहीं हिज़्बुल्लाह ने संकेत दिए हैं कि यदि ईरानी शासन के अस्तित्व को खतरा हुआ, तो वह भी सीधे युद्ध में कूद सकता है। मिसाइल हमले, ड्रोन स्ट्राइक, साइबर अटैक और समुद्री मार्गों में बाधा जैसे कदम पूरे मिडिल ईस्ट को युद्ध के कगार पर ला सकते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भले ही ये संगठन पहले के संघर्षों से कमजोर हुए हों, लेकिन असममित युद्ध (Asymmetric Warfare) की उनकी क्षमता अब भी बेहद खतरनाक बनी हुई है।
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