पश्चिम बंगाल में इस साल चुनाव हैं. सियासी घमासान के बीच SIR का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में है. सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वकीलों के साथ मौजूद रहीं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से लोकतंत्र बचाने और लोगों के अधिकारों की रक्षा करने की अपील की और पूछा कि SIR के साथ बंगाल को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है, असम को क्यों नहीं?. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि पश्चिम बंगाल के लोगों को दबाने के लिए माइक्रो-ऑब्ज़र्वर नियुक्त किए गए हैं.ममता बनर्जी ने कहा कि हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा है. मैंने निर्वाचन आयोग को छह पत्र लिखे हैं. साथ ही चुनाव आयोग पर 1.36 करोड़ लोगों को नोटिस जारी करने . आधार कार्ड को स्वीकार नहीं करने और SIR के लिए मतदाताओं से अन्य दस्तावेज मांगने के आरोप लगाए .इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग को व्हाट्सऐप आयोग तक कहा. सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि हर समस्या का समाधान होता है और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी निर्दोष व्यक्ति इससे वंचित न रह जाए. मतदाता सूची में संशोधन के दौरान प्रवासन से संबंधित मामले भी देखे जाते हैं . लेकिन पात्र व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची में होने चाहिए.ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन आधिकारी को नोटिस जारी किया है और उनसे नौ फरवरी तक जवाब मांगा है. इतिहास में ये पहला मौका है जब किसी राज्य की मौजूदा मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर दलीलें रखी हैं. केस की सुनवाई के दौरान आमतौर पर मुख्यमंत्री के वकील या सलाहकार ही पेश होते हैं.