सवाईमाधोपुर. विकास कार्यों की रफ्तार अब पर्यावरण पर भारी पड़ती दिख रही है। मंडी रोड, अन्वेषण भवन और सिविल लाइन जैसे इलाकों में सड़क निर्माण के नाम पर हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। विकास की आड़ में हरियाली पर वार ने स्थानीय संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों को चिंतित कर दिया है। भूप्रेमी परिवार संगठन ने जिला प्रशासन को पत्र सौंपकर पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग की है।
वादे अधूरे, हरियाली उजड़ी
संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि विकास के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। पूर्व में मुख्य बाजारिया क्षेत्र में डिवाइडर निर्माण के दौरान भी बड़े-बड़े छायादार वृक्ष काटे गए थे। उस समय प्रशासन ने नए पेड़ लगाने का आश्वासन दिया था, लेकिन वर्षों बाद भी पर्याप्त वृक्षारोपण नहीं हुआ। नतीजा यह है कि अब वह क्षेत्र गर्मियों में तपते रेगिस्तान जैसा महसूस होता है।
दिल्ली मॉडल का हवाला
संगठन ने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली जैसे महानगरों में सड़क निर्माण के दौरान पेड़ों को सुरक्षित रखते हुए काम किया जाता है। वहीं सवाई माधोपुर में बिना विकल्प तलाशे सीधे पेड़ों को काटा जा रहा है। भूप्रेमी परिवार संगठन ने कहा कि पेड़ केवल हरियाली नहीं, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जिले को गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ेगा।
संगठन ने यह रखी मांगे
पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगे।
जांच हो कि किस अनुमति से पेड़ काटे गए।
कितने और कहां पेड़ काटे गए, इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
काटे गए पेड़ों के स्थान पर बड़े और छायादार वृक्ष लगाए जाएं।
भविष्य में विकास कार्यों में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए।