सवाईमाधोपुर. बजरिया, सिविल लाइन और मंडी रोड सहित विभिन्न स्थानों पर विकास कार्यों के नाम पर की जा रही पेड़ों की कटाई का मामला अब न्यायिक दायरे में पहुंच गया है। इस संबंध में स्थायी लोक अदालत में जनहित याचिका विधिवत दर्ज की । जिला जज ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से प्रकरण दर्ज करने और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं।
यह याचिका पार्षद राजेश पहाड़िया, समाजसेवी रत्नाकर गोयल और अवधेश शर्मा की ओर से प्रस्तुत की। याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट जगन्नाथ चौधरी, एडवोकेट राजेश मीणा, मुकेश भूप्रेमी, प्रेमराज मीणा और भरतलाल मीणा ने पक्ष रखते हुए बताया कि बजरिया मंडी रोड जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी कर हरे-भरे और पूर्ण विकसित पेड़ों की कटाई की जा रही है।
पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों का उल्लंघन
न्यायालय के समक्ष यह भी रखा गया कि पेड़ों की कटाई सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के आदेशों तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। याचिका में स्पष्ट किया गया कि वैधानिक अनुमति, पर्यावरणीय आकलन और वैकल्पिक वृक्षारोपण की शर्तों की अनदेखी कर पेड़ों को काटा गया, जिससे आमजन के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने न्यायालय के इस हस्तक्षेप का स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बजरिया मंडी रोड पर पेड़ों की कटाई पर रोक लगेगी और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बिना अनुमति पेड़ों की कटाई और लकड़ी की बिक्री का आरोप"
जिला मुख्यालय स्थित डिस्पेंसरी परिसर में दर्जनों पेड़ों की अवैध कटाई और लकड़ी की बिक्री का मामला सामने आया है। इस संबंध में रोहित शर्मा पुत्र जनार्दन प्रसाद शर्मा निवासी बड़ी लाइन रेलवे कॉलोनी ने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत दी है।इसमें बताया कि डिस्पेंसरी परिसर में कम से कम 20 पूर्ण विकसित पेड़ों को बिना अनुमति के काटा गया और उनकी लकड़ी को अवैध रूप से बेचा जा रहा है।। यह कटाई पिछले कई माह से लगातार की जा रही है, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। आरोप है कि कटाई करने वाला व्यक्ति न केवल धमकी देता है बल्कि गाली-गलौज और अन्य आपराधिक गतिविधियों में भी शामिल है।
पूर्व शिकायतों पर कार्रवाई नहीं
शिकायत में कहा है कि इस संबंध में पूर्व में भी स्थानीय पुलिस और तहसीलदार को रिपोर्ट दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे अवैध कटाई का सिलसिला जारी है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि शेष बचे पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए, आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए, बिना लाइसेंस और टेंडर प्रक्रिया के पेड़ काटने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। साथ ही धमकी और गाली-गलौज के मामलों में भी प्रकरण दर्ज कर दोषियों को सजा दिलाई जाए। काटे गए पेड़ों का मुआवजा जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों से वसूला जाए।