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swm news: किफायती भोजन का सपना टूटा, राज रसोई पर ताला जड़ा

2026-03-07 13 Dailymotion

सवाईमाधोपुर. जिला कलक्ट्रेट परिसर के मुख्य गेट के पास दांयी ओर राज रसोई कई दिनों से ताले में कैद है। मुख्य गेट से भीतर प्रवेश करते ही दाईं ओर जो जगह कभी चहल-पहल और भोजन की महक से भरी रहने वाली थी, आज वहां सन्नाटा पसरा है। दीवारों पर राज रसोई तो लिखा है, लेकिन दरवाज़े पर जड़ा ताला इस पहल की अधूरी कहानी बयान करता है। जिस स्थान को महिला स्वयं सहायता समूहों ने आत्मनिर्भरता और पोषण का प्रतीक बनाने का सपना देखा था, वहां अब बंद दरवाज़ा और खामोशी ही दिखाई देती है।

उद्घघाटन के बाद से ही ठप रसोई
महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से आत्मनिर्भरता, पोषण और सशक्तिकरण का सपना लेकर गत 11 फरवरी को जिला कलक्टर काना राम ने राज रसोई का शुभारंभ किया था। उद्घाटन के समय यह कहा गया था कि यहां अधिकारियों, कर्मचारियों, अधिवक्ताओं और आमजन को स्वच्छ, पौष्टिक और किफायती दरों पर भोजन मिलेगा। बाजरा आधारित उत्पादों से लेकर पोहा, इडली-सांभर, पराठा और जूस तक की सूची तैयार थी।

पोषण सुधार का केन्द्र बनानी की थी योजना

कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने भी तकनीकी मार्गदर्शन देकर इसे स्थानीय उत्पादों और पोषण सुधार का केंद्र बनाने की योजना बनाई थी। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद रसोई ठप हो गई। जिस जगह से रोज़ाना चाय की खुशबू और भोजन की महक उठनी थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है। महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार की दिशा में उठाया गया यह कदम अब सवालों के घेरे में है।
नियमित मॉनिटरिंग का दावा फेल

महिला समूहों ने गुणवत्तापूर्ण सेवा और नियमित मॉनिटरिंग का वादा किया था, लेकिन आज हालात यह हैं कि रसोई बंद है और जनता की उम्मीदें अधूरी रह गई हैं। हालात यह है कि आमजन भी अब यहां ताला देखकर वापस लौट रहे है। यह दृश्य सिर्फ एक बंद रसोई का नहीं, बल्कि उन योजनाओं का प्रतीक है जो कागज़ों और मंचों पर चमकती हैं, पर ज़मीनी स्तर पर दम तोड़ देती हैं।
अब आगे क्या…
कलक्ट्रेट परिसर में राज रसोई पर ताला जड़ा है, लेकिन सवाल सिर्फ एक दरवाज़े के बंद होने का नहीं है। यह उस सोच के ठहर जाने का संकेत है, जो महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और जनसेवा के वादों से जुड़ी थी। उद्घाटन के समय जिस उत्साह से इसे शुरू किया था, वह अब खामोशी में बदल चुका है।