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Video: 871 वर्ष पुरानी चादर ज्ञान भंडार से बाहर, दर्शन को उमड़ा शहर

2026-03-07 8,413 Dailymotion

स्वर्णनगरी में आयोजित तीन दिवसीय दादागुरुदेव चादर महोत्सव के तहत शनिवार को आस्था, श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत ऐतिहासिक वरघोड़ा निकला। लगभग 144 वर्ष बाद सोनार दुर्ग स्थित पार्श्वनाथ जैन मंदिर के ज्ञान भंडार से दादागुरुदेव जिनदत्तसूरीजी महाराज की 871 वर्ष से अधिक प्राचीन पवित्र चादर को विधिवत पूजन-अर्चना के बाद बाहर लाया गया। जैन समाज में इस चादर का अत्यंत धार्मिक महत्व है और इसे गहन आस्था का प्रतीक माना जाता है। दादागुरुदेव जिनदत्तसूरि चादर समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में गच्छाधिपति आचार्य जिनमणिप्रभ सूरि, आचार्य मनोज्ञ सागर सूरि, वसन्त विजय, केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी, जैसलमेर विधायक छोटूसिंह भाटी और शिव विधायक रविन्द्रसिंह भाटी सहित अनेक जनप्रतिनिधि तथा संत-मुनि मौजूद रहे। गच्छाधिपति आचार्य जिनप्रभमणि सूरीश्वर ने कहा कि अमरसागर जैन मंदिर की स्थापना के समय चादर की पेटी नहीं खोली गई थी और इसे प्रतिष्ठा स्थल पर ही विराजित किया गया था। लगभग डेढ़ सौ वर्ष पहले वृद्धिचंद्र महाराज पाटन से यह पवित्र चादर जैसलमेर लाए थे। इतने वर्षों तक इस धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए जैन ट्रस्ट और समाज के प्रवासी परिवारों का योगदान सराहनीय रहा। उन्होंने कहा कि जैसलमेर ऐसा स्थान है जहां देश ही नहीं, विश्व के विभिन्न हिस्सों से लोग आते हैं और यहां 36 कौमों का संगम देखने को मिलता है। इसलिए जैन धर्म के इतिहास और विरासत को संरक्षित करने के लिए यहां एक विशेष संग्रहालय की स्थापना होनी चाहिए।